Sunday, 1 April 2018

देश के युवा वर्ग के लिए प्रेरक लेख



युवावस्था जीवन की ऐसी अवस्था है, जहाँ हमे सीखने और जानने को मिलता है |इस अवस्था मे हम अपने आस पास हो रहे और खुद में हो रहे परिवर्तन को जानने अथवा महसूस करने लगते हैं | हमें सही और गलत मे अंतर पता लगने लगता है|यह ही सही समय है देश के प्रति अपने दायित्व की पूर्ति का / आज देश में युवाओं की भागीदारी को लेकर बेहस छिड़ी हुई है, हर तरफ़ यही सवाल है कि आखिर हम युवाओं को किस तरह विकास की राह में अपना सारथी बना पायेंगे | इस प्रश्न का एक उत्तर यह भी है कि युवा अपना आदर्श ऐसे व्यक्ति को बनाए जो वाकई जमीनी स्तर पर युवाओ के लिये आदर्श हो|ऐसे ही एक अहम् व्यक्ति हैं स्वामी विवेकानन्द |

किसी भी देश की युवा शक्ति उस देश की बुनियाद होती है| इस बात को वैदिक धर्म के विद्वान स्वामी विवेकानन्द भली भॉति समझते थे | स्वामी जी के अनुसार युवा समाज के कर्णधार होते हैं और वही उसके भावी निर्माता हैं| उनका कहना था कि युवा शक्ति वह स्वरूप है जो नव सृजन के लिये हर जगह उभर्नी चाहिये | भारत  की युवा पीढ़ी को स्वामी जी द्वारा प्रदान किये गए ज्ञान, प्रेरणा और तेज श्रोत से लाभ उठाना चाहिये|स्वामी जी का धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण तर्कवादी तथा प्रगतिशील  था युवाओं को भी उनसे प्रेरणा पाकर उनके द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है|भारतीय  जन विशेष कर युवाओ के लिये उनका नारा था, "उठो जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको|"
जब जब मानवता निराश और हताश होगी तब तब स्वामी  विवेकानन्द जी के उत्साही, ओज़स्वी और अनंत ऊर्जा से भरपूर विचार जन जन को प्रेरणा देते रहेंगे और हमे सफ़लता के मार्ग पर अग्रसर बनाए रखेंगे|

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