त्याग और तपस्या का दूसरा नाम किसान है/ वह जीवनभर मिट्टी से सोना उत्पन्न करने की तपस्या करता है/ तपती धूप, कडा़के की ठण्ड तथा मूसलाधार बारिश भी उसकी इस साधना को तोड नहीं पाते/ एक कहावत है, कि भारत की आत्मा किसान है जो गाँवों में निवास करतें है/ किसान की कृषि ही शाक्ति है, और यह ही उसकी भक्ति है/
वर्तमान संदर्भ में हमारे देश में किसान आधुनीक विष्णु है/ वह देशभर को अन्न, फल, सब्जी-साग आदि दे रहा है, लेकिन बदले में उसे उसका पारिश्रमिक भी नही मिल पा रहा है/ प्राचीन काल से अबतक किसान का जीवन अभावों में ही गुजर रहा है/ अभी-भी उसके पास बरसों पुराने खेती के साधन है/ उसका सबकुछ मानसून पर निर्भर है/ अगर समय पर अच्छी बरसात नहीं होती है, तो उसके खेत सूखे पडे़ रहते है/ कर्मभूमि में काम करने के दौरान किसान चिलचिलाती धूप के दौरान तनिक विचलित नही होता/ किसान के जीवन में विश्राम की कोई जगह नही हैं/ वह निरन्तर अपने कार्य में लगा रहता है, कैसी भी बाधा हो उसे अपने कर्त्तव्यों से डिगा(हिला) नही सकती/ अभाव का जीवन व्यतीत करने के बाद भी वह संतोषी प्रवृत्ति का होता है/
कभी-कभी उसके मलिन मुख पर भी ताजगी दिखाई देने लगती है/ जमींनदारों के शोषण से तो उसे मुक्ति मिली है/ परन्तु आज भी वह पूर्ण रूप से सुखी नहीं है/ आज भी २० से २५ प्रतिशत किसान ऐसे है जिनके पास दो-वक्त का भोजन तक नही हैं/ शरीर ढ़कने के लिए कपडे़ नही है, टूटे मकान व टपकती झोपड़ियाँ है/ ऋणग्रस्तता ने उन्हें गरीबी के मुहँ में ढ़केल दिया है/ जमीदारों व सरकार के कर्ज के बोझ तले दबकर उसका जीवन कभी अकाल तो कभी महामारी तो कभी बाढ़ व सूखे की चपेट में आ जाता है/ ऐसी स्थिति में उसे असमय ही मृत्यु वरण करने को विवश होना पड़ता है/ कई बार तो उन्हें सपरिवार सामूहिक रूप में भीषण गरीबी से जूझते हुए आत्महत्या भी करनी पड़ जाती है/
कर्ज के बोझ तले दबा उसका जीवन किसी बन्धुआ मजदूर के जीवन से कम नही है, सच कहा जाए तो वह कर्ज में पैदा होता है/ और कर्ज में ही मर जाता है/
भारतीय कृषक का जीवन करूणा का महासागर है/ स्वयं अन्न उपजाने के बाद भी उसे तथा उसके परिवार को भरपेट खाने को अन्न नही मिलता/ किसान के लिए कृषि एक जुआ है, प्रकृति पर निर्भरता उसके जीवन की जटिल-समस्या है/
" जब बात ऐसे शक्स की हो जो खुद को गला के दूसरों का पेट भरने में, १२महीनें खेतों में जद्दो-जह्द करता नजर आए, वह है, हमारा 'किसान' /
अगर हम आज इनके दर्द को नही समझेंगे तो शायद आने वाले कल मे, हमें खेतों मे, 'किसान नजर नही आयेगें "
https://youtu.be/n54o1MP7Nuo































